Bhagvat-Rahasya-Hindi-भागवत रहस्य-55



नारदजी गुरुदेव को कहते है कि-  आपने कथा में कहा था कि  जो कथा में विक्षेप करे उसका संग छोड़ो।
मेरी माता मेरे  भजन में विक्षेप करने वाली है। मै  कथा सुनु,जप करू वह उसे पसंद नहीं है।
मेरी माँ के संग रहूँगा तो मेरी भक्ति में विक्षेप  आएगा।

माता-पिता समझते है कि संसार में ही सुख है। उनकी बस यही इच्छा होती है  कि-
पुत्र की  शादी होए,मेरे संतान होए और वंश-वृध्धि  बढ़ाये।
उनकी ऐसी इच्छा नहीं होती कि  मेरा पुत्र परमात्मा में तन्मय होए। वंश-वृध्धि  तो पशु भी करते है।  

मीराबाई को जब लोगो ने बहुत तंग किया तो उन्होंने तुलसीदासजी को पत्र लिखा कि -
मै तीन साल की थी तब से मैंने गिरिधर गोपाल के साथ शादी की है। ये मेरे सम्बन्धी मुझे कष्ट दे रहे है।
मुझे अब क्या करना चाहिए?
तुलसीदासजी ने चित्रकुट से पत्र लिखा कि- कसौटी सोने की होती है,पित्तल की नहीं।
तुम्हारी यह कसौटी है। जिसे सीता राम प्यारे न लगे,जिसे राधाकृष्ण प्यारे न लगे -
ऐसा जो सगा  भाई हो तब भी उसका संग छोड़ देना चाहिए। दुःसंग सर्वथा त्यागने योग्य है।
मीराबाई ने पत्र पढ़कर मेवाड़ का त्याग कर वृन्दावन में आ गई।
भक्ति बढ़ानी हो तो बार-बार मीरा का चरित्र पढ़ो।

गुरूजी ने कहा- तू माँ का त्याग करे यह मुझे अच्छा नहीं लगता। तुम्हारी माता भजन में विक्षेप करेगी तो ठाकुरजी कोई लीला करेंगे। संभव है वे तुम्हारी माता को उठा ले अथवा तेरी माता कि-
बुध्धि  को भगवान सुधार  देंगे। घर में रहना और इस महामंत्र का जप करना।
जप करने से प्रारब्ध बदलता है। जप की धारा  टूटे नहीं इसका ध्यान रखना।

मैंने गुरूजी से कहा कि  आप जप करने का कहते है लेकिन मै  तो अनपढ़ दासी पुत्र हूँ।  
मै जप कैसे  करूँगा? जप की गिनती कैसे करूँगा?
गुरूजी ने कहा-जप करने का काम तुम करो और जप गिनने का काम श्रीकृष्ण करेंगे।
जो प्रेम से भगवान का स्मरण करते है उनके पीछे-पीछे भगवान फिरते है।
मेरे प्रभु को और कोई काम नहीं है। जगत की उत्पत्ति और संहार का सारा काम माया को सौप दिया है।
जप गिनाए जाए -तो किसी को कहने की इच्छा होगी।
किसी को जप की संख्या कहोगे तो थोड़ा पुण्य चला जायेगा। पुण्य क्षय होगा।

गुरूजी ने मुझे वासुदेव गायत्री का मंत्र बत्तीस लाख जप करने को कहा।
बत्तीस लाख जप होगा तो विधाता का लेख  जायेगा। पाप का नाश होगा।
बेटा,इस मंत्र का सदा जप करना। मंत्र का जप करने से ईश्वर के साथ जीव का  सम्बन्ध होता है।
मंत्र के बिना ब्रह्म के साथ सम्बन्ध नहीं होता।
रोज यही भावना रखना कि श्रीकृष्ण मेरे साथ है। तेरा कल्याण होगा।
बेटा, तू बालकृष्ण का ध्यान करना। श्रीकृष्ण का बालस्वरूप अति मनोहर है।

बालक को थोड़ा दो तो भी वह राजी होता है। भावना से बालस्वरूप का ध्यान करना।


   PREVIOUS PAGE          
        NEXT PAGE       
      INDEX PAGE