"अरे,तेरे जैसा विषयी शिव तत्व को क्या जानेगा?जो शरीर को आत्मा मानता है,वह शिवतत्व को क्या जाने?
बड़े-बड़े देवता शिव के चरणों का आश्रय लेते है। शिव कृपा के बिना कृष्ण भक्ति सफल नहीं होती।
प्रवृति-निवृति से पर होकर स्वरुप में मग्न रहने वाले शिवजी परब्रह्म परमात्मा है।
मुझे दुःख हो रहा है कि शिव निंदा करने वाले दक्ष की मे पुत्री हूँ। "
सती उत्तर दिशा के प्रति मुख रखकर -देह को छोड़ने के लिए योगमार्ग में स्थिर होकर बैठी है।
शिवजी का ध्यान करते-करते उन्होंने शरीर में अग्नितत्व की भावना कि.
अंदर से क्रोधाग्नि बाहर आई। शरीर जलने लगा।
ऐसे,आदिशक्ति जगदम्बा का अपमान हुआ। अब दक्ष का कल्याण नहीं है।
नारदजी कैलास में शिवजी के पास पधारे है। भगवान शंकर सनकादि ऋषियों को ब्रह्म विध्या का उपदेश दे रहे है। नारदजी सोच रहे है कि शिवजी कितने भोले है। सती ने शरीर को जला दिया,फिर भी उनको दुःख नहीं हुआ।
वे शिवजी से कहते है -आप विधुर हुए है। आप इन लोगो को दंड दीजिए।
शिवजी कहते है-मुझे किसी को भी सजा नहीं देनी है।
जो गंगाजी को सिर पर रखे उसे क्रोध नहीं आ सकता।
बहुत सरल मनुष्य को जगत में दुर्बल मानते है।
नारदजी ने जब कहा कि आपके गणो को मारा है तब वे क्रोधित हुए।
उन्होंने जटा से वीरभद्र को प्रकट किया।
शिवजी ने उनसे कहा,दक्ष प्रजापति के यज्ञ का यजमान सहित तुम नाश कर दो।
वीरभद्र दक्ष के वहाँ आये। उसने बड़ा संहार किया। यज्ञभूमि श्मशान भूमि बन गई। यज्ञ का विध्वंस हुआ।
दक्ष को पकड़कर उसका मस्तक अलग कर दिया गया। देवता घबरा गए। वे ब्रह्माजी के शरण में गए।
ब्रह्माजी ने सबको उपालम्भ दिया कि -जिस यज्ञ में शिवजी की पूजा नहीं होती थी,वहाँ तुम क्यों गये?
जाकर शिवजी की क्षमा-याचना करो।
देवता कहते है -हमारे अकेले जाने की हिम्मत नहीं है। आप भी साथ चलो।
भगवान शंकर की कृपा के बिना सिध्धि नहीं मिलती।
सब देवता कैलास में आते है।
ब्रह्माजी कहते है -यज्ञ को उत्पन्न करने वाले आप है और विध्वंस करने वाले भी आप है।
अतः अब यज्ञ परिपूर्ण हो ऐसा कीजिये। आप भी वहाँ पधारिये। शिवजी भोले है। जाने के लिए तैयार हो गए।
यज्ञमंडप में रुधिर की नदियाँ बहते हुए देखी तो वे वीरभद्र को उलाहना दिया।
की-"मैने तुझे शान्ति से काम लेने के लिए कहा था।"
वीरभद्र क्षमा-याचना करता है।
दक्ष के धड़ पर बकरे का सिर लगाया गया।
बकरा अति कामी होता है। शिवजी की निंदा करने वाला दूसरे जन्म में बकरा बनता है।